बैंकों की स्थापना एक प्राचीन और ऐतिहासिक प्रक्रिया है। वे विशेष संस्थान हैं जो नगद धन जमा करते हैं, ऋण प्रदान करते हैं, विभिन्न वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करते हैं। इसका इतिहास विभिन्न युगों में उस समय तक पहुंचता है जब लोग पहली बार व्यापारिक गतिविधियों के लिए धन के नियंत्रण की आवश्यकता महसूस करने लगे।
वैदिक काल: वैदिक काल में नगदी व्यापार के लिए व्यापारिक संस्थानों की जरूरत नहीं थी, क्योंकि इस समय पर्याप्त समृद्धि और सामर्थ्य व्यक्तियों के पास था जो स्वयं व्यापार और व्यापार के साथ संबंधित गतिविधियों का प्रबंध करते थे। धार्मिक यज्ञों और परंपरागत पद्धतियों में संबंधित धन का उपयोग किया जाता था।
मौर्य वंश: मौर्य राजवंश (चार शताब्दी ईसा पूर्व) के समय में, व्यापार व्यवस्था में वृद्धि हुई और लोगों के बीच विभिन्न नगदी व्यवसाय और व्यापार समारोहों का आयोजन होता था। इस विकास के साथ, व्यापारिक संबंधों को सुचारु रूप से प्रबंधित करने की आवश्यकता महसूस हुई, जिससे बैंकों की स्थापना का आविष्कार हुआ। इस समय के प्राचीनतम बैंकों में कृषि और व्यापार संबंधित ऋणों का प्रदान किया जाता था।
गुप्त राजवंश: गुप्त राजवंश (चौथी से आठवीं शताब्दी ईसा पूर्व) के समय में भारतीय व्यापारिक व्यवस्था में भी वृद्धि हुई। इस समय पर भारतीय सूचकांकों और साहित्यिक प्रमाणों से पता चलता है कि गुप्त राजवंश के समय में व्यापारी और वित्तीय संस्थानों के बीच विविध ऋण और उधारी सेवाएं प्रदान की जाती थीं।
मुगल राजवंश: मुगल राजवंश (16वीं से 18वीं शताब्दी) के समय में भी व्यापार और व्यापारिक गतिविधियों में वृद्धि हुई और इससे विभिन्न नगदी संस्थानों की जरूरत पड़ी। मुगल सम्राटों के समय में, सरकारी बैंकों के साथ ही निजी व्यक्तिगत बैंक भी विकसित हुए थे।
ब्रिटिश सम्राट: ब्रिटिश साम्राज्य (18वीं से 20वीं शताब्दी) के समय में बैंकों की स्थापना और उनका प्रशासन सकारात्मक ढंग से विकसित हुआ। ब्रिटिश सम्राट के शासन काल में व्यापार और वित्तीय गतिविधियों में बड़ी उन्नति हुई और बैंकों को संरचित रूप से प्रबंधित किया गया। ब्रिटिश शासन के समय में प्रथम बैंक ऑफ इंग्लैंड की स्थापना 1694 में हुई, जिसे विश्व का सबसे प्राचीन राष्ट्रीय बैंक माना जाता है। इसके बाद भारतीय भाषा के लोगों ने भी विभिन्न शहरों में अपने निजी बैंक खोलने शुरू किए, जिनमें कई सालाना उधारी सेवाएं और वित्तीय संबंधित उपचार प्रदान किए जाते थे।
भारत में बैंकों की स्थापना: भारत में बैंकों की स्थापना का इतिहास भी विशाल है। भारत में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) विश्व का पहला सेंट्रल बैंक है, जिसकी स्थापना 1 अप्रैल 1935 को ब्रिटिश सरकार के शासनकाल में हुई। रिजर्व बैंक ने भारतीय वित्तीय बाजार के नियंत्रण, नोटमुद्रा, और बैंकों के शोध और विकास के क्षेत्र में एक अहम भूमिका निभाई है।
भारत में पश्चिमी भाषा के लोगों ने भी अपने निजी बैंकों की स्थापना की, जिनमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) जैसे प्रमुख बैंक शामिल हैं, जिसे 1 जुलाई 1955 को स्थापित किया गया था।
आज, भारत में विभिन्न सरकारी और निजी बैंक संघ हैं, जो विभिन्न वित्तीय सेवाएं प्रदान करते हैं और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को संचालित करने में मदद करते हैं। इन बैंकों ने विशेषतः बड़े व्यवसायों, उद्यमियों, और व्यक्तिगत उपभोक्ताओं को वित्तीय समर्थन प्रदान करके अर्थव्यवस्था की सुस्ती से उभरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं।
