लाल क़िला (Red Fort) दिल्ली, भारत के राष्ट्रीय राजमहलों में से एक है और एक ऐतिहासिक इमारत है। यह मुग़ल सम्राट शाहजहाँ द्वारा 17वीं सदी में दिल्ली की द्वितीय राजधानी के रूप में बनाया गया था। लाल क़िला को उन्होंने अपने पिता और प्रारंभिक मुग़ल सम्राट अकबर के पुराने फोर्ट सलीमगढ़ के स्थान पर बनवाया था। यह एक मुग़ल शैली में निर्मित है और इसकी विशेषता उसके लाल रंगीले पत्थर से है, जो इसे लाल क़िला के नाम से जाना जाता है।
लाल क़िला के इतिहासिक महत्व के कारण, यह विश्व धरोहर स्थल और यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थलों की सूची में शामिल है। यह दिल्ली का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है और हर साल 15 अगस्त को भारतीय स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यहां परेड आयोजित किया जाता है।
लाल क़िला विशाल भवन है, जिसकी लंबाई लगभग 2.4 किमी है और उसके चारों ओर सीमाएँ हैं। इसमें भवनों, गलियों, बाग़ों, और नालों के साथ दरबार और विशेष अवधारणाएँ होती हैं। लाल क़िला का प्राचीन दरवाज़ा यमुना नदी की तरफ़ ख़ुलता है और इसके दरवाज़ों के आगे चाँदनी चौक का बाज़ार होता है। इस भवन की दीवारें लाल रंग में रंगी होती हैं, जिससे इसका नाम लाल क़िला पड़ा।
लाल क़िला के विभिन्न भवनों में दर्शकों के लिए दर्शनीय स्थल हैं जैसे कि दीवान-ए-आम, दीवान-ए-ख़ास, रंगमहल, मोती मस्जिद, जमा मस्जिद, और नहार-ए-बेहिस्त आदि। लाल क़िला के भवन और उपकरणों का अद्भुत विकास उस दौरान हुआ, जब मुग़ल साम्राज्य दिल्ली की राजधानी था और इसे समर्थन और विकास का केंद्र बनाया गया था। लाल क़िला अपने समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण एक महत्वपूर्ण और महत्वपूर्ण स्थल है, जो भारत की शान है।

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