CT (Computed Tomography) Scan मशीन का अविष्कार 20वीं सदी के बीच हुआ था। यह तकनीक रेंटगन विकिरण का प्रयोग करके शरीर के आंतरिक भागों की त्रूटियों की छवियाँ प्राप्त करने के लिए उपयोग होती है।
1972 में ब्रिटिश इंजीनियर गोद्फ्रे हाउन्सफील्ड (Godfrey Hounsfield) ने CT स्कैन की पहली विचारशीलता को अपनाया था। उन्होंने रेंटगन किरणों का उपयोग करके शरीर के अंदर की त्रूटियों की छवियाँ प्राप्त करने का तरीका विकसित किया। इसके बाद, उन्होंने यह तकनीक बेहतर बनाने के लिए कई सुधार किए और 1979 में पहली बार ऐसी CT स्कैन मशीन का निर्माण किया जिसका उपयोग मेडिकल डायग्नोस्टिक्स में किया जा सकता था।
1980 में, उन्हें इस काम के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया, और CT स्कैन तकनीक उनके योगदान के आधार पर विकसित हुई। CT स्कैन का अविष्कार मेडिकल डायग्नोस्टिक्स में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी तकनीक के रूप में माना जाता है, जो डॉक्टरों को शरीर के भीतर की छवियाँ प्राप्त करने में मदद करता है।
